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भगतसिंह के विचार ही शहीद समरसता मिशन के विचार है –मोहन नारायण

ABHIRAM MISHRA | Nation1 Voice

Updated on : March 24, 2022
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भगतसिंह के विचार ही शहीद समरसता मिशन के विचार है –मोहन नारायण


इंदौर । "एक छोटे से काल में भगतसिंह को समझ पाना लगभग असंभव है, भगतसिंह ने अपने जीवन से अपने हर एक विचार से, दर्शन से राष्ट्र को प्राण वायु दी हैं। लेकिन दुर्भाग्य है आज देशभर में एक नेरेटिव बनाने की कोशिश की जा रही है। कोई बब्बर खालसा का आतंकवादी पीछे भगतसिंह का चित्र लगाता है, तो हमे दर्द होता है! भगतसिंह से तुम्हारा क्या लेना- देना? जब कोई नक्सलवाद का आंदोलन हमारे देश के सैनिकों की छातियों को चीरता है, उनकी पीठ में खंजर भोकता है वो अपने आंदोलन के पीछे शहीद भगतसिंह का चित्र लगाकर कहता है, हां मैं भी क्रांतकारी हूं! जब कोई जेएनयू, जादवपुर, एफटीआईआई से आवाज उठाता है। भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी जंग रहेगी, जंग रहेगी, उस समय उसके हाथ में भगतसिंह का चित्र रहता है तब हमारा दिल खून के आसूं रोता है! क्या भगतसिंह ऐसे लोगों के आदर्श हो सकते है ? " यह बात शहीद समरसता मिशन के संस्थापक क्रांतिधर्मा मोहन नारायण ने इंदौर के प्रीतमलाल दुआ सभागृह में आयोजित "भगतसिंह का भारत" कार्यक्रम के दौरान कही। 

क्रांतिधर्मा मोहन नारायण ने देश में चल रहे खालिस्तानी मूवमेंट पर जुबानी हमला बोलते हुए कहा "देश को तोड़ने के मंसूबे पालने वाले ये समझ ले, ये 'भगतसिंह का भारत' है इसे कोई तोड़ नहीं सकता। खालिस्तान की मांग करनें वाले कान खोल के सुन ले ये पूरा हिंदुस्तान ही खालिस्तान है। इसकी रज–रज गुरुओं के रक्त से रोशन है, यहां की नदियां खुद उनका यशगान करती है। ऐसे गुरुओं के बलिदान की यशस्वी परंपरा के ध्वजवाहक है शहीद भगतसिंह !
शहीद भगत सिंह को इंडियन माओं की तरह पेश करना बंद करो। इस महामृत्युंजय भारत की परिकल्पना भगतसिंह के उद्दात चिंतन के बगैर संभव नहीं।

क्रांतिधर्मा मोहन नारायण ने शहीद भगतसिंह के विराट व्यक्तित्व का चित्र उकेरते हुए कहा "भगतसिंह एक अपूर्व भविष्य दृष्टा थे। 1931 लाहौर क्रांति के बाद उन्होंने कहा था अंग्रेजो की जड़े हिल चुकी है वो 15 साल में हमें छोड़कर चले जायेंगे,समझौता हो जाएगा। लेकिन उससे देश का कोई भला नहीं होगा, कई साल उथल -पुथल में बीतेंगे। उसके बाद लोगों को मेरी याद आएगी। आज इस दौर में भी भगतसिंह के विचार उतने ही प्रासंगिक है जितने की तब थे। 


कालजयी विचारों की सहस्त्रधारा है भगतसिंह

सामाजिक समस्या के एक संवेदनशील समाज शास्त्री थे 
भगतसिंह. मुक्ति के मार्ग की ओर जाने वाली यात्रा के महान दार्शनिक थे भगतसिंह, वो लेखक थे, पत्रकार थे, साहित्यकार थे, चार पुस्तकें उन्होंने लिखी। सैंकड़ों लेख उन्होंने लिखें, हजारों पुस्तकों का अध्ययन, राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय समस्याओं का समाधान करने वाले उस विराट व्यक्तित्व का नाम भगतसिंह था। उन कालजयी विचारों का नाम है भगतसिंह । 


सामाजिक न्याय का सर्वोच्च मॉडल भगतसिंह का मॉडल

समरसता किसी कोर्ट,थाने,कचहरी,कानून से नहीं बल्कि परस्पर संवाद से समाज में स्थापित की जा सकती है। सामाजिक न्याय का सर्वोच्च मॉडल भगतसिंह का मॉडल है और यही शहीद समरसता मिशन का मॉडल भी हैं । जब अत्याचार करने वाले समाज के मन में ये संवेदनशील भावना जागृत हो जाएगी की ये मेरा अपना समाज है, सारी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। इस दिशा में शहीद समरसता मिशन ने भी मालवा के 1500 गावों की चौपालों पर  "समरसता संवाद" स्थापित किया। हमें गर्व है उनमें से 750 से अधिक गांवों ने "एक मंदिर, एक कुआं, एक श्मशान" के विचार को आत्मसात किया। 

गौरतलब है कि शहीद समरसता मिशन वर्ष 2007 से शहीदों के सम्मान, उनके परिवारों की शिक्षा, चिकित्सा, आवास,बेटी के विवाह जैसे अनेकों विषयों पर देश के 10 राज्यों में कार्यरत है। स्वतंत्रता के बाद 36 हजार शहीदों को एक –एक करोड़ की सम्मान राशि जैसे 28 सूत्रीय मांगो पर रचनात्मक एवं आंदोलनात्मक कार्य कर रहा है। इसी कड़ी में मिशन ने अब "आजाद भगतसिंह के साथी" अभियान का भी शंखनाद किया है जिसमें गुमनाम वीर राष्ट्र नायकों के सर्वोच्च बलिदान को सर्वोच्च सम्मान दिलाने का दृढ़ संकल्प है।

इसी कड़ी में मिशन द्वारा "आजाद भगतसिंह के साथी" अभियान का भी शंखनाद किया जिसमें 150 से अधिक स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों के घर पहुंचकर उन्हें कृतज्ञता पूर्वक समानित किया जायेगा। जिसकी शुरुआत 23 मार्च को क्रांतिकारी जयदेव कपूर और शिव वर्मा की प्रतिमा हरदोई (उ. प्र.) में स्थापित करने के साथ की जायेगी। 

शहीद भगतसिंह फैंस क्लब, इंदौर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में गुरु सिंघ सभा यूथ विंग ने युवा समाजसेवी सनी टुटेजा के नेतृत्व में क्रांतिधर्मा मोहन नारायण का सम्मान सिख परंपरा की शान कही जाने वाली पगड़ी पहना कर किया। इस मौके पर मिशन की सक्रिय सदस्य मंजीत संधू गर्ग ने पगड़ी की महत्ता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन डॉ.जगदीश चौहान ने किया जबकि आभार शहीद समरसता मिशन के साथी सदस्य राहुल राधेश्याम ने माना।



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