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बुनकरों के हालात बनते जा रहे हैं बद से बदतर, मिट्टी खाकर जीने के हो रहे हालात

Prity Priya | Nation1 Voice

Updated on : January 13, 2022
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बुनकरों के हालात बनते जा रहे हैं बद से बदतर, मिट्टी खाकर जीने के हो रहे हालात


DIGITAL DESK BIHAR:- भागलपुर। वैसे तो रेशम की शहर के नाम से जाने जाने वाला शहर भागलपुर बुनकर के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन आज हालात यह है कि बुनकर व्यवसाई अपने परिवार का भरण पोषण करने में भी बद से बदतर स्थिति में चले गए हैं, हस्तकर्घा व्यवसाई को कोरोना का दंश इस कदर झेलना पड़ रहा है कि कारोबार तो ठप पड़ ही गए। परिवार पालने के लिए राशन जुटा पाने पर भी लाले पड़ गए हैं

,भागलपुर में कोरोना के बढते मरीजों की संख्या लॉकडाउन के लगने के आसार को लेकर बुनकर सहमें हुए हैं, सरकार भी इस पर कोई पहल नहीं कर रही। पहली और दूसरी लहर में तो कई बुनकर अपना पावरलूम बेचकर या बंद कर दूसरे राज्यों में पलायन कर गए हैं।

कई बुनकरों ने अपने पावर लूम बेच कर दो साल बिताए तो कई बुनकर सिल्क के दूसरे व्यवसायी के पास मालिक से मजदूर बनकर काम करने लगे हैं। बुनकरों के दर्द और तकलीफ को सरकार भी नहीं सुन रही है।भागलपुर शहरी क्षेत्र में 35 से 40 हजार बुनकर है। बुनकर व्यवसायियों पर मानो कोरोना की काली नजर पड़ गई हो, उनका जीना दुश्वार हो गया है। चंपानगर की महिला बुनकर तारा बेगम ने कहा कि उसके पास चार लूम थे दो बार लॉकडाउन लगा तो दोनों को बेचकर किसी तरह गुजारा किया।

अब अगर फिर लॉक डाउन लगता है तो दोनों लूम भी बिक जायेंगे।बुनकर जुलकरनैन जिसके पास कभी पावर लूम की चार मशीनें थी उसके पास अब दो ही बची है वह भी बदतर हालात में…. जुलकर ने रुहांसे भरे शब्दों में बताया कि 2 साल लॉकडाउन को झेले है। अब नहीं झेला जाएगा। सरकार हम पर ध्यान नहीं दे रही है यही स्थिति रही तो मिट्टी खाने के हालात पैदा होंगे।



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