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लॉकडाउन के कारण दिहाड़ी मजदूरों को नहीं मिल रहा काम, जीना हुआ दूभर

SABA SHAHID SHAIKH | Nation1 Voice

Updated on : May 19, 2021
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लॉकडाउन के कारण दिहाड़ी मजदूरों को नहीं मिल रहा काम, जीना हुआ दूभर


इसकी पहली वजह लोगों के पास पर्याप्त पैसे नहीं हैं, दूसरा संक्रमण का खतरा होने के डर से लोग इन्हें काम सेने से बच रहे हैं। लिहाजा दिहाड़ी मजदूरों की स्थिति बद से बदत्तर होती जा रही है। हमने दिहाड़ी मजदूरों की पीड़ा को समझने कतरास थाना चौक पहुंचा। रोज की भांति दर्जनों मजदूर बंद दुकानों के चौखट पर बैठे पाए गए। ये प्रतिदिन यहां सुबह सात-आठ बजे के करीब पहुंच जाते हैं। कोई ग्राहक नहीं मिलने की स्थिति में दस बजे पुनः अपने घरों को लौट जाते हैं। ये सिलसिला मुसलसल चलता ही जा रहा है। पचगढ़ी मस्जिद पट्टी के रहने वाले राज मिस्त्री मो जाबिर अंसारी बताते हैं कि पिछले साल भी जिंदगी फाकाकशी में ही गुजरी। सोचा इस साल कुछ बेहतर होगा। लेकिन कोरोना के बढ़ते मामले व लॉकडाउन ने सारे अरमानों पर पानी फेर दिया। बमुश्किल सप्ताह में एक-दो दिन ही काम मिल पाता है। इतने में घर चला पाना मुश्किल हो रहा है। तेतुलमारी के रहने वाले राज मिस्त्री किशोर का भी कहना है कि कोई पार्टी (ग्राहक) आता है तो मजदूर आपस में ही झगड़ पड़ते हैं। जिसका फायदा पार्टी उठाते हैं। उन्हें उचित मजदूरी नहीं मिल पा रहा है। परिवार में सात सदस्य हैं। घर चलाना मुश्किल हो रहा है। जाबिर और किशोर जैसी ही पीड़ा रामू, रोहित, अमित, राज, सुदामा, मुर्तजा, मुंशी, संतोष, गौरीशंकर, महेंद्र, दिनेश, रीना देवी, संतरा देवी, शांति देवी, लक्ष्मी देवी आदि दिहाड़ी मजदूरों की भी है। ये मजदूर हर सुबह इस उम्मीद पर मोड़ पर पहुंचते हैं कि आज कोई न कोई उन्हें ले जाने वाला मिल जाएगा लेकिन दूसरे दिन काम मिलने की हसरत लिए वे अपने घरों को लौट जाते हैं।



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