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धौनी के लिए ये साल होगा निर्णायक, नजर आ सकते हैं नये रोल में

SABA SHAHID SHAIKH | Nation1 Voice

Updated on : July 07, 2021
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धौनी के लिए ये साल होगा निर्णायक, नजर आ सकते हैं नये रोल में


DIGITLAL DESK : Ranchi : भारतीय क्रिकेट टीम के  पूर्व कैप्टेन महेंद्र सिंह धौनी जिस तरह से यूनिक हेलीकॉप्टर शॉट मारकर चौंकाते हैं ठीक उसी तरह से वे अचनाक लिये गये अपने फैसलों से भी लोगों को अचरज में डाल देतें हैं। अब देखना ये है कि आज अपना 40 वां जन्मदिन मना रहे रांची के राजकुमार माही अब कौन सी नयी राह अपनायेंगे।
 
धौनी अभी आइपीएल की टीम चेन्नई सुपरकिंग्स के कप्तान हैं। आइपीएल का 14 सीजन कोरोना की वजह से बीच में ही स्थगित करना पड़ा था. अब इसका दूसरा पार्ट यूएई में होना है. इस टूर्नामेंट के बाद अक्टूबर में आइपीएल के 2022 सीजन के लिए आक्शन शुरू होगा। इसलिए  ये संभावना बनती है कि धौनी अक्टूबर के बाद ही अपने लिए नयी राह के बारे में कोई फैसला करें।
वैसे धौनी के नये रोल के बारे में इसी सप्ताह आस्ट्रेलिया के पूर्व गेंदबाज ब्रैड हाग ने एक अनुमान लगाया था कि अगर अगले सीजन के लिए सीएसके धौनी को रीटेन नहीं करेगा तो भी वो सीएसके नही छोड़ेगे . वे कोच की भूमिका में टीम से जुड़े रहेंगे.
MS Dhoni is not leaving @ChennaiIPL He is the Maharaja of the franchise. He will transition into a coaching role. #IPL https://t.co/DtCmjtEk6c
— Brad Hogg (@Brad_Hogg) July 5, 2021
इसके अलावा भी जो संभावनाएं बनतीं हैं उसके अनुसार धौनी क्रिकेट से ही जुड़ी अन्य गतिविधियों से जुड़ सकते हैं जैसे टीवी पर क्रिकेट कमेंट्री करना बीसीसीआई में किसी नयी भूमिका जैसे कोच, सलेक्टर या पदाधिकारी के रूप में।
 
राजनीति में लाने की भी हुई हैं कोशिशें
झारखंड के स्थानीय नेताओं ने धौनी को राजनीति के मैदान में उतारने की कोशिशें कई बार की हैं लेकिन धौनी इससे कतराते रहें हैं। कुछ भाजपा नेताओं ने तो बकायदा मीडिया में बयान तक दिया था कि धौनी पार्टी ज्वाइन कर रहे हैं लेकिन धौनी ने कुछ नहीं कहा ओर बड़े जहीन तरीके से बिना कोई विवाद उत्पन्न किये इससे दूर ही रहें हैं।
 
टाईमिंग के मामले में परफेक्ट हैं
 
धौनी टाईमिंग के मामले में परफेक्ट हैं। ये इनकी सबसे बड़ी खासियत है। धौनी से मुलाकातें ज्यादा नहीं दो-चार बार ही हुईं पर उसके खेल के करियर को गौर से देखा है. खासकर जब वो इंडिया ए टीम का हिस्सा बने तो पहली बार उस पर ध्यान गया था। उन दिनों मैं रांची एक्सप्रेस में था. धौनी खेल संवाददाता चंचल भट्टाचार्य से मिलने आया करता था. उसका हाव-भाव या कहे बॉडी लैंग्वेज मुझे अच्छी लगी थी।
महेन्द्र सिंह धौनी ने अपनी रेलवे की टीटीई की नौकरी छोड़ने के लिए भी  सही वक्त चुना था. वक्त भी अब तक धौनी का साथ निभाता आ रहा है। जिस समय धौनी का चयन भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान पूर्वी क्षेत्र के सौरभ गांगुली थे. बोर्ड के अध्यक्ष भी पूर्वी क्षेत्र के जगमोहन डालमिया। जबकि इसके पहले लंबे अर्से तक मुंबईया खिलाड़ियों का वर्चस्व रहा था। इस एकाधिकार की प्रवृत्ति को कपिल देव ने तोड़ा था। कपिल ने टीम में उत्तर और उत्तर पश्चिम भारत के खिलाड़ियों को भी मौका दिलवाया. इसका सुखद परिणाम ये निकला कि 1983 में भारत ने वन डे क्रिकेट का विश्व कप जीतकर इतिहास रच दिया।कपिल देव के लीडर के रूप में खुद आगे बढ़कर शानदार ढंग से खेलने और टीम के लिए प्रेरक बनने से भारतीय टीम का कायाकल्प हो गया। इस ऐतिहासिक जीत ने भारत में क्रिकेट को देश का सबसे लोकप्रिय खेल बना दिया।
कपिल के बाद अजहर और सौरभ गांगुली ने भी भारतीय क्रिकेट टीम का नेतृत्व किया. कई सीरीज भी जिताए पर कपिल देव टाइप मजा नहीं आया।
धौनी और वक्त की जुगलबंदी ने बहुत ही करीने से सौरभ गांगुली के हाथ से कप्तानी छीनकर धौनी को सौंप दी। वो भी राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर, अनिल कुंबले, युवराज सिंह और सहवाग के रहते हुए।धौनी ने अपने चुनाव को सही साबित करते हुए टीम इंडिया को वन डे और T20 में भी विश्व चैंपियन बनाया। वे भारत के सफलतम कप्तानों में अव्वल बन गए। धौनी ने कई सीनियर खिलाड़ियों की जगह खाली होने पर युवा खिलाड़ियों को मौका दिया।
 
दिल की भी सुनते हैं और दिमाग की भी
 
धौनी मुझे समकालीन खिलाड़ियों में सबसे बेहतरीन विकेटकीपर बैट्समैन नहीं लगते।एडम गिलक्रिसट इस मामले में मेरी पहली पसंद हैं, लेकिन कप्तानी में धौनी के मुकाबले कोई नहीं टिकता। धौनी दिल की भी सुनते हैं और दिमाग की भी दर्जनों क्रुशियल मैचों में अचानक से अपना बल्लेबाजी क्रम तोड़ कर वो खुद मैदान में पहुंच जाते हैं और टीम को संकट से निकाल कर जीत दिलाते हैं। जब टीम इंडिया फिल्डिंग कर रही होती है तो गेंदबाजी में अचानक अजीबोगरीब परिवर्तन कर वो विशेषज्ञों और बैट्समैन दोनों को हैरत में डालते हुए हाथ से निकले हुए कई मैच जिताते नजर आते हैं।
धौनी ने आस्ट्रेलिया में जब टेस्ट टीम की कप्तानी छोड़ी थी तो उसकी भी टाइमिंग एकदम सही थी धौनी स्थितियों के आकलन करने में जितने माहिर हैं उतने ही निर्विकार भाव से निर्णय लेने में भी। जब उन्होंने वन डे और टी 20 की कप्तानी छोड़ी तो ये भी परफेक्ट टाइमिंग थी।धौनी जान गए थे कि अब विराट कोहली को पूरी जिम्मेदारी देने का सही वक्त आ गया है और वे इसमें रुकावट नहीं बनना चाहते थे।
अब देखना ये है कि 40 साल के धौनी अपने लिए कौन सी नयी भूमिका तय करते हैं. माही को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।



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