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आखिरकार देश के लोकतंत्र की जीत हुई है, किसानों को न्याय मिला:बादल पत्रलेख

DABLU RANA | Nation1 Voice

Updated on : November 21, 2021
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आखिरकार देश के लोकतंत्र की जीत हुई है, किसानों को न्याय मिला:बादल पत्रलेख


DIGITAL DESK JHARKHAND- देवघर:- शनिवार को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा कृषि बिल को वापस लेने की घोषणा पर प्रेस को संबोधित करते हुए झारखंड सरकार के कृषि एवं पशुपालन मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि आखिरकार देश के लोकतंत्र की जीत हुई है। करोड़ों किसानों को न्याय मिला है। यह कानून भूमि अधिग्रहण बिल की तरह आखिरकार प्रधानमंत्री को वापस लेना पड़ा।

कृषि बिल पर प्रधानमंत्री के यू टर्न लेने को एक राजनीतिक चाल बताया। मंत्री ने कहा कि सबसे पहले इस कानून को लोकतंत्र की हत्या करते हुए सदन में बिना बहस कराए, बिना किसानों की राय लिए पारित किया गया। यहाँ तक  कृषि राज्य का विषय है तो राज्य के विधानसभा या विधान परिषद में भी चर्चाएं नहीं कराई गई, संवैधानिक प्रक्रियाओं को पूरा नहीं कराया गया। जाने इससे क्या डर था।

 जिस प्रकार से एकाएक प्रधानमंत्री टीवी पर आते हैं और नोटबंदी जीएसटी आदि की घोषणा कर देते हैं, जो देश की जनता के लिए एक डेथ वारंट सिद्ध हो रहा है। बिल वापस हुआ पर करीब 700 से अधिक किसानों की सहादत  के बाद।  करीब एक वर्ष के आंदोलन के पश्चात प्रधानमंत्री को यहाँ के किसानों का दर्द समझने का जो एहसास हुआ यह दिखावा और छल है। इस कानून को वापस लेने का एक मात्र मकसद है वो अगले वर्ष आनेवाला विधानसभा चुनाव को लेकर। विगत विधानसभा के उपचुनाव के नतीजा में अपनी हार को देखने के बाद यह जानने का विषय है कि सिखों के महान प्रकाश पर्व गुरु नानक जयंती के दिन ही आखिर यह घोषणा किन कारणों से करने पड़ी है। यह देश की जनता अच्छी तरह से जान चुकी है।

देश की आम जनताओं की भावनाओं से खेलने वाले प्रधानमंत्री को जादूगरी करने का महारत हासिल है। देश के आंदोलनकारी किसानों को आंदोलन जीबी, उग्रवादी, आतंकवादी, गुंडे के साथ प्रायोजित आंदोलन का संज्ञा देने का काम किया था आज किसान आंदोलनकारियों के साथ विपक्षी पार्टियों के एकता के आंदोलन का यह  नतीजा है। 1955 में जो आवश्यक वस्तु अधिनियम में सामानों को रखा गया था।

उसमें से दलहन और तिलहन को हटाने का प्रयास किया गया था। जबकि वर्तमान समय में और आवश्यक सामानों को जोड़ने की जरूरत थी। जैसे आज राज्य सरकार ने मास्क, सेनीटाइजर आदि सामानों को जोड़ने का काम किया है। केंद्र की सरकार अपने चंद पूंजीपति मित्रों के लिए यह कानून बनाने का काम किया था और कानून बनाने के पहले सैलिलोज बनने लगे थे। यह सरकार जनहित में काम करना नहीं चाहती है।   नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा अकेले फैसले लेने का अलोकतांत्रिक कृत्य किया जा रहा है।जब यह कानून बना तब भी सदन में नहीं लाया गया और आज भी घोषणा करने के पहले कैबिनेट की मंजूरी नहीं ली गई।

यह कैसी लोकतंत्र की स्थापना करना चाहते हैं। यही वजह है कि इस कानून के लाने के बाद इनके ही कैबिनेट के मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था। जब इनके साथ आगामी चुनाव में कोई साथ देने को तैयार नहीं हुआ। ऐसी परिस्थिति में चुनाव के मद्देनजर एक समझौता के तहत यह फैसला लिया गया। यह फैसला किसानों के हित को देखते हुए नहीं लिया गया,यह अपने पार्टी के हित को देखते हुए लिया गया है।

 येआम जनों की बात सुनते हैं और ना ही मीडिया के सामने कभी आते हैं। जब देश में अमेरिका के राष्ट्रपति आते हैं तो प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं। मीडिया बंधुओं से बातें करते हैं। लेकिन सबसे बड़ा लोकतंत्र का देश का मुखिया मीडिया के सामने आने से क्यों घबराते हैं। आखिर किस बात का डर है। किसानों की या प्रारंभिक जीत है हम इस आंदोलन का समर्थन करते रहे हैं और किसान हित में तथा देश हित में आंदोलन जारी रहेगा। यह एक लोकतंत्र की जीत है सत्याग्रह की जीत है। इस मौके पर वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष प्रो. उदय प्रकाश,राजेंद्र दास, फैयाज केशर, मीडिया प्रभारी दिनेश कुमार मंडल, सेवादल के अजय कुमार,अवधेश प्रजापति, अशोक कुमार सिंह, मकबूल आलम, प्रमिला देवी,गणेश दास, राधा पाल, पंजाबी रावत, उपेंद्र राय,रवि वर्मा, राजा साहिल, रोशन सिंह,अर्जुन राउत, धनेश्वर पंडित,अब्दुल रहीम, अरविंद कुमार आदि मौजूद थे।



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