अब जीन्स पहनने वाले नहीं कर सकेंगे काशी विश्वनाथ के दर्शन

Garima Bharti | Nation1 Voice

Updated on : January 13, 2020


अब जीन्स पहनने वाले नहीं कर सकेंगे काशी विश्वनाथ के दर्शन


उत्तर प्रदेश: भारत के ऐतिहासिक मंदिर, हिन्दुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक काशी विश्‍वनाथ मंदर जहाँ 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक स्थापित है, वहां के नियमों में कुछ बदलाव आया है. अगर आप भी इन दिनों बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए जा रहे हैं तो जाने से पहले इस सूचना को ध्यान से पढ़िए वरना आप बाबा विश्वनाथ के स्पर्श -दर्शन नहीं कर पाएंगे. कशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन की व्‍यवस्‍था तय करने को लेकर सूबे के धर्मार्थ कार्य मंत्री नीलकंठ तिवारी की अध्‍यक्षता में मंदिर प्रशासन और काशी विद्वत परिषद के सदस्‍यों की बैठक कमिश्‍नरी सभागार में हुई. विद्वानों की सहमति से तय हुआ कि विग्रह स्‍पर्श यानी की बाबा विश्वनाथ के स्पर्श दर्शन के लिए पुरुषों को धोती-कुर्ता और महिलाओं को साड़ी पहननी होगी. पैंट शर्ट, जींस, सूट, कोट पहने श्रद्धालु स्‍पर्श करने की बजाए सिर्फ दर्शन कर सकेंगे।आपको बता दें कि ऐसी व्‍यवस्‍था उज्‍जैन के महाकाल समेत दक्षिण भारत के मंदिरों में लागू है.
बैठक के बाद नीलकंठ तिवारी ने बताया कि विश्‍वनाथ धाम में पौरोहित प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना है. इस केंद्र में कर्मकांड के साथ कंप्‍यूटर और अंग्रेजी की शिक्षा का तीन-तीन माह का कोर्स चलाया जाएगा. शास्‍त्रार्थ के लिए भी अलग जगह निर्धारित होगी.
काशी विश्‍वनाथ मंदिर में स्‍पर्श दर्शन के लिए ड्रेस कोड लागू होने के साथ-साथ स्‍पर्श दर्शन की अवधि भी बढ़ाई जा रही है. इसका निर्णय रविवार को मंदिर प्रशासन और काशी विद्वत परिषत के विद्वानों की हुई बैठक में लिया गया.बैठक में विद्वानों के सुझाव पर बाबा विश्‍वनाथ का स्‍पर्श दर्शन मध्‍यान्‍ह भोग आरती से पहले 11 बजे तक किए जाने पर सहमति बनी. मंदिर में पूजा पाठ करने वाले सभी श्रधालुओं का भी ड्रेस कोड निर्धारित किए जाने पर खासा जोर रहा. विश्‍वनाथ धाम परिसर में मिले प्राचीन मंदिरों और विग्रहों को शास्‍त्रोत और पौराणिक विधि से संयोजित करने की रूप रेखा तय करने के लिए विद्वत परिषद के पदाधिकारी जल्‍द मंदिरों का निरीक्षण करेंगे. आपको बता दें कि यह नई व्यवस्था मकर संक्रांति के बाद लागू होगी और मंगला आरती से लेकर दोपहर की आरती तक प्रतिदिन या व्यवस्था लागू रहेगी. यह नया नियम लोगों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने और हिन्दू रीती- रिवाज और पूजा के नियमों को अंतराष्ट्रीय पहचान दिलाने के मद्देनज़र लागू किया गया है. 
 



leave a comment

आज का पोल और पढ़ें...

फेसबुक पर लाइक करें

ट्विटर पर फॉलो करें


मनोरंजन सभी ख़बरें पढ़ें...

खेल-जगत सभी ख़बरें पढ़ें...

व्यापार सभी ख़बरें पढ़ें...