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क्या भारत सरकार ने अपने ही मंत्रियों के फोन टेप कराए ? जानिए सियासी गलियारे में उठे तूफ़ान के पीछे की कहानी

SABA SHAHID SHAIKH | Nation1 Voice

Updated on : July 19, 2021
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क्या भारत सरकार ने अपने ही मंत्रियों के फोन टेप कराए ? जानिए सियासी गलियारे में उठे तूफ़ान के पीछे की कहानी


DIGITAL DESK : NEW DELHI: अमेरिकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट की एक खबर के बाद भारत के सियासी गलियारे में तूफान आ गया है। खबर है कि प्राइवेट इज़राइली सॉफ्टवेयर पेगासस का इस्तेमाल कर भारत में करीब 300 लोगों की जासूसी की गई। जिन लोगों की जासूसी की गई उनमें सरकार के मंत्री भी शामिल हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में अन्य राजनेता, जज और पत्रकार भी शामिल हैं। इस खबर क बाद सरकार सवालों के घेरे में आ गई है। माना जा रहा है कि आज से शुरू हो रहे संसद सत्र में भी विपक्ष इस मुद्दे को उठा सकता है. हलांकि सरकार ने इस रिपोर्ट का खंडन किया है।

वाशिंगटन पोस्ट ने दुनियाभर के 16 अन्य मीडिया सहयोगियों के साथ मिलकर ‘द पेगासस प्रोजेक्ट’ नाम से जांच रिपोर्ट जारी की है। इसमें दावा किया गया है कि प्राइवेट इज़राइली सॉफ्टवेयर पेगासस का इस्तेमाल फोन टैप करने में किया गया। इसमें दुनियाभर के 37 स्मार्टफोन को हैक करने में कामयाबी भी मिली। ये स्मार्टफोन बड़े पत्रकार, मानवाधिकार कार्यकर्ता, व्यापारी अधिकारी और दो ऐसी महिलाओं के हैं जो कि सऊदी अरब के पत्रकार जमाल खसोगी की हत्या से जुड़ी थीं।

भारत को लेकर जो दावा किया गया है उसके अनुसार भारत में करीब 300 लोगों की जासूसी पेगासस के स्पाइवेयर के ज़रिए की गई, जिसमें 40 पत्रकार भी शामिल हैं. इन सभी के फोन हैक करने का दावा किया गया है उनमें मंत्री से लेकर विपक्ष के नेता, पत्रकार, लीगल कम्युनिटी, कारोबारी, सरकारी अफसर, वैज्ञानिक और एक्टिविस्ट्स तक शामिल हैं। दावा है कि इन लोगों पर फोन के ज़रिए निगरानी रखी जा रही थी. हालांकि केंद्र सरकार ने इस रिपोर्ट का खंडन किया है।

भारत सरकार ने इस रिपोर्ट का खंडन करते हुए कहा है कि सरकार पर कुछ लोगों की जासूसी के जो आरोप लगे हैं उसका कोई मज़बूत आधार नहीं है और न ही इसमें कोई सच्चाई है। बयान में कहा गया है कि इससे पहले भी इस तरह का दावा किया गया था, जिसमें वाट्सएप के ज़रिए पेगासस के इस्तेमाल की बात कही गई थी. वो रिपोर्ट भी तथ्यों पर आधारित नहीं थी और सभी पार्टियों ने दावों को खारिज किया था।

बताया गया है कि पेगासस स्पाइवेयर के ज़रिए इंडियन एक्सप्रेस, हिंदुस्तान टाइम्स, न्यूज़ 18, इंडिया टुडे, द हिंदू, द वायर और द पायनियर जैसे मीडिया संस्थानों से जुड़े पत्रकारों की जासूसी की गई। बताया गया है कि एक भारतीय एजेंसी ने साल 2017 से लेकर 2019 के बीच इन सस्थानों में काम करने वाले पत्रकारों की निगरानी के लिए इनके फोन को टैप किया था।

दरअसल इज़राइली सॉफ्टवेयर पेगासस एक मिलिट्री ग्रेड स्पाइवेयर है जिसका इस्तेमाल आतंकियों और अपराधियों को ट्रैक करने के लिए किया जाता है।



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