4 सितंबर को करतारपुर मामले में होगी भारत-पाकिस्तान की बैठक

Garima Bharti | Nation1 Voice

Updated on : September 01, 2019


4 सितंबर को करतारपुर मामले में होगी भारत-पाकिस्तान की बैठक


डेस्क,नेसन वन वॉइस: भारत और पाकिस्तान के बीच करतारपुर गलियारे कॉरिडोर को लेकर तीसरी बैठक चार सितंबर को होगी। ये बैठक अटारी में होगी। ये बात समाचार एजेंसी एएनआई ने पाकिस्तान के सूत्रों के हवाले से कही है।

 आपको बता दें की 1 सितम्बर से सिख तीर्थयात्रियों के लिए वीजा प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। गुरु नानक देव के 550वें जन्मदिवस समारोह में शामिल होने वाले तीर्थयात्री वीजा ले पाएंगे। यह फैसला बुधवार को धार्मिक पर्यटन और विरासत समिति ने राज्यपाल चौधरी सरवर की अध्यक्षता में गवर्नर हाउस में एक बैठक के दौरान लिया गया था।

पंजाब के राज्यपाल चौधरी सरवर ने कहा था, "12 नवंबर को बाबा गुरु नानक के 550वें जन्मदिन के अवसर पर यहां आने के इच्छुक भारतीय और अन्य देशों के सिख तीर्थयात्रियों के लिए वीजा प्रक्रिया एक सितंबर से शुरू होकर 30 सितंबर को खत्म होगी।" पत्रकारों से बात करते हुए सरवर ने कहा था, "इसपर काम करने या न करने की भारत की इच्छा के बिना पाकिस्तान नवंबर तक करतारपुर कॉरिडोर परियोजना का काम पूरा कर लेगा। पाकिस्तान जाने वाले सिख तीर्थयात्रियों को हर तरह से सुविधा दी जाएगी।"

पाकिस्तान ने करतारपुर गलियारे पर 'जीरो लाइन' से गुरद्वारा साहिब तक 90 फीसदी काम पूरा कर लिया है और इस साल नवंबर में गुरु नानक की 550वीं जयंती के मौके पर इसका उद्घाटन किए जाने की योजना है।

 गलियारा पाकिस्तान के करतारपुर स्थित दरबार साहिब को गुरदासपुर जिले में डेरा बाबा नानक गुरुद्वारे से जोड़ेगा। इससे भारतीय सिख श्रद्धालुओं को वीजा मुक्त आवागमन की सुविधा मिलेगी। इन श्रद्धालुओं को करतारपुर साहिब जाने के लिए केवल एक 'परमिट' प्राप्त करना होगा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारत से तीर्थयात्रियों का पहला जत्था नौ नवंबर को पाकिस्तान पहुंचेगा।

भारत और पाकिस्तान के बीच पांच अगस्त के बाद से तनाव जारी है। इस दिन भारत ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के खंड दो और तीन को खत्म कर दिया है। इसके साथ ही राज्य को दो क्रेंद्र शासित प्रदेश- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख बना दिया गया है। तभी से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है।

पाकिस्तान से इस मामले का अंतरराष्ट्रीकरण करने की भी खूब कोशिशें की लेकिन उसे मुंह की खानी पड़ी। वहीं भारत शुरू से ही ये बात कहता आया है कि ये उसका आंतरिक मामला है।



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